...तूफ़ान कश्तियों को आजमाया करते है.....
...फलसफा कुछ ऐसा है ऊपर वाले का.....
.....गैर नहीं अपने ही ...सताया करते है.....
.....ज़िन्दगी में जो आये नहीं ...करने दुवा-सलाम .....
...वोह रोज़ मेरी कब्र पर आया करते है .....
......हम कुछ इस तरह ...ज़िन्दगी बिताया करते है.....
.......आग से दिल की...खुद ही को जलाया करते है.......
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