..ज़रा जज़्बात संभालो यारो....अभी कई दौर बाकी है ...
...दिल से दिल मिलते नहीं ...नज्रोएँ का काम बाकी है....
....उठ कर हम भी चल देते ....कोई अपना भी आशना होता....
.....चार दीवारों को कह देते घर.....अगर महफ़िल से दिल भरा होता........
.....फिर लौट के आया हु मयखाने में ........तनहा हु अभी......
.......किसी की याद में नहीं.......शौकिया लिख लेते है हम कभी-कभी........
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment