Thursday, July 29, 2010

muqaddar .....

....देख कर मुझको मुक़द्दर भी सहम जाता है ......
....दिल  धडकता है जब आँखों में लहू आता है....
.......मेरी ज़िन्दगी है या रेत  का घरोंदा......
...में बनाता हु  आशना जब सागर में तूफ़ान आता है....

.....यूं ही जागा हु सदियों से  सोया नहीं हु मै ......
........नींद लगती है मुझे और ख्वाब बिखर जाता है .......
....गिनता रहता हु हर लम्हा वक़्त की विरासत है.....
.......सुकून आता है जब दर्द हद से गुज़र जाता है......

देख कर मुझको मुक़द्दर भी सहम जाता है .....
...दिल धड़कता है जब आँखों में लहू आता है ......

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