Thursday, July 29, 2010

zakhm...

.....ज़िन्दगी के है ज़ख्म....और वक़्त का मरहम है......
....जलता हुआ दिल है .....और आँख का पानी है  .....
.....रूह कब तलक जिस्म के आचल में छुपेगी ......
.....कतरा कतरा लहू का ..जैसे तेज़ कटारी है ......

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