Thursday, December 13, 2007

SHAAM

यूँ तोएं हर रोज़ ही शाम होती है.....
वक़्त कि घडी संसोएँ के नाम होती है....
फिर रेंग कर चलती है रुकी रुकी सी ख्वाहिशे....
देखें यह ज़िंदगी अब किसके नाम होती है..........

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